माहरः- यह कहार जाति का नवां भेद है




 ९-माहरः- यह कहार जाति का नवां भेद है


'महाउर' नाम के एक क्षत्रिय राजा हुए हैं जिनका वंश महावर कहाते कहाते माहर व महरा कहाने लगा यह नाम राजपूताना में भी प्रचलित है। इनकी संख्या भारत के एक यू० पी० में १२१०८७ है।


महरा का दूसरा नाम देश भेद के कारण "मेरा" भी है यह कहारों की एक जाति है। एक समय बादशाह शाहबुद्दीन- गौरी का पेट कुजा तो सहज में आराम न हुआ उस समय बहुत से क्षत्रिय जो शाहबुद्दीन की कैद में थे उनमें एक बुद्धिमान क्षत्रिय वैद्यक जानने वाला था उसने बतलाया कि "बादशाह साहय को विजोरा खिलाओ" तदनुसार विजोरा से बादशाह को आराम मालूम हुआ तव बादशाह सलामत ने प्रसन्न होकर उस दक्षत्रिय को बुलाकर कहा 'तुम क्या चाहते हो ?' वह बोला हुजूर मेरी जाति के मनुष्य कैद में से छोड़ दिये जायें यह बाद- शाह ने लोकार किया और हुकुम दिया कि "जिस २ को यह अपना बतलाये वे सब छोड़ दिये जाय तब उसने जेलखाने में आकर जिनको कहा कि यह मेरा, यह मेरा वे वे सब छोड़दिये गये तबसे मेरे व महरे कहाये। इनकी सन्तति बढ़ने के कारण ये लोग देश देशान्तर में फैलगये और महरा व मेरा की एक आति अलग बनगई पश्चिमोत्तर प्रान्त में ये लोग बहुत हैं ये जत्ति पालकी व पिंजस उठाने तथा पत्त्थर घढ़ने व द्युत बनाने का भी काम करते हैं तथा मारवाड़ में ये लोग कुछ राज के रसोड़ों में भी काम करते हैं जहां ये लोग मांस व मांस के बने पदार्थ तय्बार करते हैं इसको रजवाड़े में "मेरो को तयारी" कहते हैं।


इसद्दो महरा शब्द से अंग्रेजी के ज्ञाताथों ने बहरा कहना आरम्भ कर दिया जो कि ग्रेजी शब्द Bearer से बिगड़कर हिन्दी भाषा में महरा के स्थान में चहरा होमया जो कि एक कहार जाति का भेद है।



Post a Comment

Previous Post Next Post