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Showing posts from January, 2025

हिन्दुओं के प्रमुख वंश, जानिए अपने पूर्वजों को

  भारतीय लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ऋषि मुनियोंकी संतानें हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश के कई पुत्र और पुत्रियां थी। इन सभी के पुत्रों और पुत्रियों से ही देव (सुर), दैत्य (असुर), दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, वानर, नाग, चारण, निषाद, मातंग, रीछ, भल्ल, किरात, अप्सरा, विद्याधर, सिद्ध, निशाचर, वीर, गुह्यक, कुलदेव, स्थानदेव, ग्राम देवता, पितर, भूत, प्रेत, पिशाच, कूष्मांडा, ब्रह्मराक्षस, वैताल, क्षेत्रपाल, मानव आदि की उत्पत्ति हुई।  वंश लेखकों, तीर्थ पुरोहितों, पण्डों व वंश परंपरा के वाचक संवाहकों द्वारा समस्त आर्यावर्त के निवासियों को एकजुट रखने का जो आत्मीय प्रयास किया गया है, वह निश्चित रूप से वैदिक ऋषि परंपरा का ही अद्यतन आदर्श उदाहरण माना जा सकता है। पुराण अनुसार द्रविड़, चोल एवं पांड्य जातियों की उत्पत्ति में राजा नहुष के योगदान को मानते हैं, जो इलावर्त का चंद्रवंशी राजा था। पुराण भारतीय इतिहास को जलप्रलय तक ले जाते हैं। यहीं से वैवस्वत मन्वंतर प्रारंभ होता है। वेदों में पंचनद का उल्लेख है। अर्थात पांच प्रमुख कुल से ही भारतीयों के कुलों का विस्तार हुआ। विभाजित वंश : संप...

कूर्म अवतार को 'कच्छप (कश्यप) अवतार' भी कहते हैं

  कूर्मावतार विष्णु के प्रख्यात अवतारों में दूसरा और भागवत-निर्दिष्ट बाइस अवतारों में ग्यारहवाँ (१/३/१६) कूर्मावतार है। कहा गया है कि अमृत की प्राप्ति के लिए देव और असुर समुद्र-मन्थन कर रहे थे, उस समय विष्णु ने कूर्म-रूप धारण कर मन्दराचल को अपनी पीठ पर धारण किया था। पुराणों में कूर्म (कमठ, कच्छप कश्यप) को विष्णु का रूपान्तरण कहा गया है, पर वैदिक साहित्य में (मत्स्य की तरह ही) कूर्म भी प्रजापति का ही रूपान्तरण है। शतपथ ब्रा. (७/५/१/५) के अनुसार कूर्म प्रजापति का रूपान्तरण है। प्रजापति ने अपत्यों की सृष्टि करते समय कूर्मरूप ग्रहण किया था-स यत् कूर्मो नाम। एतदै रूपं कृत्वा प्रजापतिः प्रजाः असृजत। 'कूर्म' को स्पष्ट करते हुए कहा गया है-यदसृजत अकरोत् तत्, यदकरोत् तस्मात् कूर्मः। कश्यपो वै कूर्मः । तस्मादाहुः सर्वाः प्रजाः काश्यप्य इति (वही) अर्थात् 'सृजन' किया था को ही कहते हैं 'किया' था। इस रूप से 'सृजन' किया था, इस कारण इस रूप को कूर्म (कृ करना औणादिक मनिन्) कहते हैं। कूर्म का ही अपर नाम कश्यप है। इसी कारण सारी प्रजा कश्यप १२१ की सन्तान कही जाती है। पाश्चात्...

कहार (कश्यप) जाति का इतिहास, कहार शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

 कहार भारत में पाई जाने वाली एक हिंदू जाति है. इनका इतिहास प्राचीन और गौरवशाली है. यह खुद को कश्यप ऋषि और सप्तऋषियों का वंशज होने का दावा करते हैं. कश्यप ऋषि मरीचि के पुत्र थे. ऐसी मान्यता है कि मरीचि से ही सारे देवताओं और असुरों की उत्पत्ति हुई है. कहार एक बहादुर और साहसी जाति है. पारंपरिक रूप से यह जाति अपने जीवन यापन के लिए प्राचीन काल से ही डोली या पालकी उठाने और उसकी रक्षा करने का कार्य करती आई है. इन्हें गोंड, गौड़, धुरिया कहार, मेहरा, भोई, चंद्रवंशी क्षत्रिय कहार आदि नामों से भी जाना जाता है. कहार जाति के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि पुराने समय में जब डाकुओं का प्रचलन जोरों पर था. ये डाकू रास्ते में दुल्हन की डोली और गहने जेवर लूट लिया करते थे. डोली की रक्षा के लिए कहर दल का गठन किया गया था जो दुल्हन की डोली को सुरक्षित अपने गंतव्य पर पहुंचाते थे. इनके पूर्वज विकट परिस्थितियों में जान पर खेलकर राज परिवार के बहू- बेटियों को डोली में बिठाकर, जंगलों और बीहड़ों से होते हुए, उन्हें दुश्मनों और डाकुओं से बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुचाते थे. लेकिन राजे रजवाड़ों के शासन समाप...

महान स्वतंत्रता सेनानी मास्टर मोता सिंह कश्यप जी

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  कश्यप निषाद समाज के लोगों ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़ कर भाग लिया है और सर्वसमाज के लोगों में संघर्ष का जज्बा पैदा किया। ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे पंजाब के मास्टर मोता सिंह कश्यप जी। स्व० मोता सिंह कश्यप का जन्म गांव पतारा जिला जालंधर में 28 फरवरी 1888 श्री गोपाल कश्यप जी के घर हुआ था। इनकी माता जी का नाम रेल्ली देवी था। प्राथमिक शिक्षा इन्होंने गांव के स्कूल में ही प्राप्त करी और दसवी के बाद पढ़ाई के साथ-2 जालंधर के निजी स्कूलो में अध्यापक का काम करने लगे। पंजाब यूनिवर्सिटी से इन्होंने बी.ए। अंग्रेजी के साथ-2 पंजाबी भाषा में ज्ञानी और फारसी भाषा में मुंशा-ए-फाजिल की उपाधि प्राप्त करी। सन् 1914-15 में मास्टर मोता सिंह कश्यप जी संत सिंह सुक्खा सिंह मिडल स्कूल, अमृतसर में बतौर हैडमास्टर नौकरी करने लगे। मास्टर मोता सिंह कश्यप जी ने कई अन्य स्कूलो में भी बतौर अध्यापक सेवाएं दी जिनमे मालवा का हाई स्कूल, खालसा हाई स्कूल दमदम साहिब, खालसा स्कूल फिरोजपुर आदि प्रमुख थे। 1918-19 में मोता सिंह कश्यप जी अध्यापन कार्य दमनकारी रॉलेट एक्ट के विरोध में आजादी की जंग में शामिल हों गए और 11 अप्...

हिंगलाज माता की स्थापना कहार ढीमर (महतों) परिवार ने किया

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  हिंगलाज माता हथकुरी-पवई, जिला पन्ना इनका नामहिंगलाज माता है और इन्हें हथकुरी की हिंगलाज माता के नाम से ही जाना जाता है ये पवई जनपद मुख्यालय से लगभग 15 कि.मी. की दूरी पर स्थित हैं। इनका कोई उपनाम तो ज्ञात नहीं होता किन्तु इनकी मान्यता बहुत अधिक है। इनकी स्थापना का ज्ञान यहाँ के भक्तों को तो नहीं है ना ही इनकी स्थापना की परिस्थितियों का ही भान है किन्तु यहाँ पर माता के कारनामों एवं उनके भक्तों की रक्षा के एवं विभिन्न रहस्यों के चर्चे विभिन्न भक्तों के जुबान पर आते रहते हैं। इन माता को यहाँ कौन लाया इसकी जानकारी तो यहाँ के भक्तों को नहीं है किन्तु पुराने बुजुर्गों द्वारा बताया जाता है कि इन्हें एक कहार ढीमर (महतों) परिवार ने यहाँ पर बसाया था और उनके परिवार के लोग ही मुख्यरूप से हिंगलाज माता की पूजा-अर्चना करते रहे हैं।..... बताया जाता है कि जब माता यहाँ के जंगलों में निवास करती थीं और कहार ढीमर परिवार की छठवीं पीढ़ी के परदादा इनकी पूजा जंगल में किया करते थे तभी माता ने स्वप्न दिया कि उन्हें बस्ती में ले जाया जाए ताकि लोगों में आस्था के बीज अंकुरित हो सकें और अमन चैन स्थापित हो सके; ...

श्री छज्जू राम धीवर (कश्यप)

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  सतगुर प्रसादि ॥ गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब पा.प्वी अम्बाला (हरियाणा) संखेप ऐतिहासिक  यह स्थान श्री गुरु हर कृष्ण साहिब जी की चरन छोह प्राप्त है। गुरु साहिब जी दिल्ली जाते समय विक्रमी 1720 माघ सुदी 7,8,9 को इस स्थान पर आए और तीन दिन रह कर संगतों को पवित्र उपदेश द्वारा निहाल किया। श्री लाल चन्द पंडित के प्रशन पूछने पर गुरु साहिब जी ने गूंगे बहरे छज्जू झीवर को साथ ही बने पानी के कुण्ड़ में (यहां पर सरोवर साहिज है) स्नान करवा के कृपा दृष्टि कर सिर के ऊपर छड़ी रखकर श्री मद् भागवत् गीता के अर्थ करवा दिये । उसी समय पंड़ित का अंहकार टूट गया। वह गुरु साहिब के चरनों में गिर पड़ा और श्रद्धालु सिक्ख बन गया। गुरु जी के आदेश अनुसार उसने आपना सारा जीवन सिक्खी के प्रचार में लगा दिया। गुरु साहिब जी ने रेत की टिब्बी लगाकर उसमें सुन्दर निशान साहिब को खड़ा किया और वर दिया कि आज से इस स्थान पर जो भी मनुष्य प्रेम भावना से आयेगा और सरोवर साहिब में स्नान करेगा, उसकी हर इच्छा पूर्ण होगी और यहाँ पर गंगे बहरे ठीक होंगे। यह बचन कर गुरु जी कुछ सिक्ख संगतों के साथ दिल्ली की ओर चले गये नोट- यहाँ पर हर ...

कश्यप समाज में एकता और विकास के लिए विशेष कार्यक्रम

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  जय महर्षि कश्यप! जय कश्यप! कश्यप समाज में एकता और विकास के लिए विशेष कार्यक्रम हमारे समाज की ताकत हमारी एकता है, और इसे और मजबूत करने के लिए हम एक विशेष "डिबेट और संवाद कार्यक्रम" का आयोजन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है: समाज के इतिहास की जानकारी साझा करना। यदि किसी भाई या बहन को कोई परेशानी या समस्या है, तो वे अपनी बात खुलकर रख सकें। एक-दूसरे की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करना। समाज के गौरवशाली इतिहास को जानकर अगली पीढ़ी को प्रेरित करना। कार्यक्रम की मुख्य बातें: 1️⃣ इतिहास पर चर्चा: समाज के विद्वान और बुजुर्ग हमारे इतिहास और संस्कृति पर प्रकाश डालेंगे। 2️⃣ खुला मंच: हर व्यक्ति अपनी बात बिना किसी झिझक के रख सकेगा। 3️⃣ समाधान: सामूहिक चर्चा से समस्याओं का हल निकालने की प्रक्रिया। 4️⃣ एकता और सहयोग: समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का प्रयास। आइए, इस कार्यक्रम में भाग लें और समाज को एक नई दिशा दें। "आपका सहयोग, समाज का विकास!" Program Video -  https://youtube.com/@allindiakashyapmanch?si=XUVCpUy0TNvs37Ul जय महर्षि कश्यप! जय कश्यप समाज

कश्यप (धीवर) जाती का इतिहास | All India kashyap Manch

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  धीवरः यह भेद दो शब्दों के संयोग से बना है अर्थात् धी + वरः धीवर= बुद्धिवान व्यक्ति  धर्म के 10 लक्षण होते है  धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।। (मनुस्‍मृति ६.९२)  उन में से एक हैं  1- धी का अर्थ है बुद्धि । बुद्धि एक साधन है जो परमात्मा ने मनुष्य को इसलिए दिया है कि वह ज्ञानार्जन कर सके । फिर विभिन्न प्रकारों से उसका प्रयोग करके, अनेकों उपकरणों, कार्य के साधनों का निर्माण करके, इस जीवन में हम सुख प्राप्त करें और दुखों को घटाएं । और, बुद्धि मोक्ष के लिए भी उतनी ही आवश्यक है, क्योंकि ज्ञान के बिना मोक्ष प्राप्त करना सम्भव ही नहीं। भक्ति-मार्गी ऐसा समझते हैं कि भक्ति ही परमात्मा को पाने के लिए पर्याप्त है, परन्तु यह सही नहीं । ज्ञान, भक्ति और कर्म का सही समन्वय ही हमें उस अत्यन्त दुरूह लक्ष्य तक पहुंचा सकता है । 2- वर की परिभाषाएं और अर्थ वर - सर्वोत्तम । विशेष—इस शब्द का प्रयोग प्रायः श्रेष्ठता सूचित करने के लिये संज्ञा या विशेषणों के आगे होता है । जैस,—पंडितवर, विज्ञवर, वीरवर, मित्रवर । श्रेष्ठ । उत्तम ...

कश्यप ऋषि और कश्मीर का इतिहास | All India kashyap Manch

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  पौराणिक कथा: सतीसर झील का उल्लेख: नीलमत पुराण के अनुसार, कश्मीर एक विशाल झील थी, जिसे सतीसर कहा जाता था। यह झील दैत्य जलोद्भव का निवास स्थान थी, जो अपनी शक्तियों से वहां के निवासियों को परेशान करता था। कश्यप ऋषि का योगदान: कश्यप ऋषि ने ब्रह्मा जी की सहायता से झील का जल सूखा दिया। यह उन्होंने वराह (सूअर) अवतार की मदद से या जल निकासी के लिए एक प्राकृतिक चैनल बनाने के माध्यम से किया। झील के सूखने के बाद, कश्यप ऋषि ने इस भूमि पर मानव सभ्यता की स्थापना की भौगोलिक और ऐतिहासिक पहलू: कश्मीर का प्राचीन नाम "कश्यप-भूमि" या "कश्यपमर" था। "कश्मीर" शब्द संस्कृत के "क" (जल) और "शिमिर" (सूखा) से भी लिया गया हो सकता है, जो कश्यप ऋषि की जलनिकासी प्रक्रिया का संकेत देता है। कुछ ऐतिहासिक लेखों में उल्लेख है कि इस क्षेत्र में कश्यप ऋषि के वंशजों ने भी मानव समाज और संस्कृति को आगे बढ़ाया। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व: कश्यप ऋषि को भारतीय पौराणिक साहित्य में सात प्रमुख ऋषियों (सप्तऋषि) में से एक माना गया है। उनकी पत्नी अदिति, देवताओं की माता मानी जाती है...

सभी कश्यप भाइयों के लिए जरूरी बात 😮

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  जय महर्षि कश्यप जय कश्यप समाज  2024 के हमारे मुख्य लक्ष्य थे जो पूरे हुआ आप सब के सहयोग से  1 - पूरे भारत का एक ऐसा ग्रुप बनाना जिस में समाज के एक्टिव लोग हो और जानकारी सभी तक पहुंच सके और उस पर एक्शन लिया जाए All India kashyap sanghtan - AIKS के द्वारा हमारा ये लक्ष्य भी पूरा हुआ 🔗 1 -  https://chat.whatsapp.com/B4rFX3Uh7r4I2uF1IozFw2 2- एक ऐसी साइट बनाना जिस पर हमारे कश्यप समाज की हर जानकारी हो और उसे हम कभी भी देख रखे The Kashyap Community के द्वारा हम उस में भी सफल रहे है 🔗2 - https://thekashyapcommunity.blogspot.com/?m=1 3- एक ऐसा मंच तैयार करना जिस पर हम हमारे समाज के लोगों को क्या परेशानी हो रही हैं जहां पर वो अपनी बात को खुल कर रखे ऐसा भी हमने एक मंच तैयार कर लिया है All India Kashyap manach -AIKM 🔗3-  https://youtube.com/@allindiakashyapmanch?si=zMGilc5XjyloUKrv आप सभी के सहयोग से ही ये सभी लक्ष्य पूरे हुआ है और आशा करते है आगे भी आप अपना साथ बनाए रखे  जय महर्षि कश्यप जय कश्यप समाज 👏