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Showing posts with the label कश्यप #kashyapsamaj #kashyaphistory #Kashyap #karankashyap143 #jayshreeram #कश्यप #निषाद Chjju Jhivar An Introduction छज्जू झीवर (Chjju Jhivar)

धर्मवीर से धीवर तक: कश्यप समाज की गौरवशाली गाथा

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  कश्यप समाज का इतिहास सिर्फ एक जातीय पहचान की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, सम्मान और उत्थान की ऐसी गाथा है जो भारतीय समाज के हर दौर में गूंजती रही है। यह यात्रा किसी साधारण समुदाय की नहीं, बल्कि उस परंपरा की है जिसने जल, जीवन और सभ्यता को आकार दिया। ऋषि कश्यप के वंशजों का यह समाज कभी धर्मवीर था, फिर सामाजिक भेदभाव की आग में झुलसकर ‘धीवर’ बना, लेकिन आज यह फिर अपने स्वाभिमान और अधिकारों की लौ जलाकर नए युग की ओर अग्रसर है। --- 🔥 प्राचीन काल: जब कश्यप समाज था सर्वोच्च 🔥 अगर हम इतिहास के स्वर्ण युग में झांकें, तो कश्यप समाज की जड़ें भारतीय संस्कृति के मूल में मिलती हैं। ऋषि कश्यप को संपूर्ण मानवता का अग्रज माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख – महाभारत, रामायण और पुराणों में कश्यप समाज का गौरवशाली वर्णन है। समुद्र, नदियों और जल स्रोतों के संरक्षक – सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वैदिक युग तक, कश्यप वंशज जल संसाधनों के विशेषज्ञ थे। राजा-महाराजाओं के सलाहकार और योद्धा – वेदों में वर्णित है कि यह समाज सिर्फ जल-संरक्षण में ही नहीं, बल्कि युद्ध और प्रशासन में भी भागीदारी करता था। इस काल में क...

हरियाणा कश्यप राजपूत सभा 16 फरवरी 2025 कुरुक्षेत्र मीटिंग

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  कश्यप समाज महम चौबीसी  आज दिनांक 16 फरवरी 2025 को हरियाणा कश्यप राजपूत सभा की मीटिंग हुई जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष श्री समे सिंह कश्यप ने कई मिटिंग में अभी नगर निगम एवं नगर पालिका चुनाव में समाज के उम्मीदवार को समर्थन देने एवं विजय बनाने के लिए सभा ने निर्णय लिया । 24 मई 2025 को होने वाली महर्षि कश्यप जयंती पर विचार किया एवं सभा का विस्तार करते हुए कई हल्का प्रधानो कि न्युक्ति कई । मिटिंग में सभा के चैयरमैन रामकुमार ऐडवोकेट बीरभान आर्य मुख्य महासचिव परमजीत कोर संरक्षक दयानंद पंवार प्रधान जिला सोनीपत कृष्ण एडवोकेट उप प्रधान ऐडवोकेट जगदीश महा सचिव रामदिया कश्यप प्रधान जिला करनाल शेर सिंह पूर्व ए एस आई जिलाध्यक्ष कुरूक्षेत्र महा सिंह प्रधान जिला जिन्द रणधीर सुलखनी उपाध्यक्ष एडवोकेट राजबीर उपाध्य्क्ष चन्द्रभान यूमनानगर उपाध्यक्ष धर्मबीर कश्यप प्रधान कर्मचारी विंग डा दलबीर उप प्रधान कर्मचारी विंग रण सिंह सुबेदार दरसू राम सोनीपत सुनेहरा बडोता राजेश टंडन सचिव पवन प्रधान यूवा बराडा रामपाल उप प्रधान यूवा बराडा पिंकी प्रधान महिला विंग करनाल गुलाब गढिबरल श्यामा सदरपूर द...

Important Meeting कश्यप समाज | The Kashyap Community

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  दिनांक 16.2.2025 दिन रविवार प्रात: 10:00 बजे को हरियाणा कश्यप राजपूत सभा रजिस्टर्ड नंबर 184/2345 की प्रांतीय स्तर की प्रदेश कार्यकारिणी की विशेष बैठक यूथ हॉस्टल नजदीक Parakit पिपली कुरुक्षेत्र में रखी गई है जिसकी अध्यक्षता Samey Singh कश्यप प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा कश्यप राजपूत सभा करेंगे ! सभी प्रांतीय स्तरीय ,जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारी से निवेदन है की मीटिंग में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधारे! इस मीटिंग का एजेंडा निम्नलिखित है  नंबर 1- प्रांतीय स्तरीय ,जिला स्तरीय ,हल्का स्तरीय कार्यकारिणी का विस्तार  नंबर 2- निगम चुनाव, नगर परिषद चुनाव नगर कमेटी का चुनाव लड़ रहे हैं उनकी मदद करना व विचार विमर्श करना नंबर 3-आने वाली 24 May 2025 महर्षि कश्यप जयंती के प्रोग्राम को लेकर विचार विमर्श करना व रूपरेखा तैयार करना नंबर 4- सभा को मजबूत करने के लिए विचार विमर्श करना  नंबर 5- समाज की सामाजिक ,राजनीतिक व धार्मिक स्थिति पर विचार विमर्श करना  अन्य मुद्दे प्रधान की आज्ञा अनुसार  निवेदक :-  वीरभान आर्य मुख्य महामंत्री हरियाणा कश्यप राजपूत सभा रजि नंबर 1...

कूर्म अवतार को 'कच्छप (कश्यप) अवतार' भी कहते हैं

  कूर्मावतार विष्णु के प्रख्यात अवतारों में दूसरा और भागवत-निर्दिष्ट बाइस अवतारों में ग्यारहवाँ (१/३/१६) कूर्मावतार है। कहा गया है कि अमृत की प्राप्ति के लिए देव और असुर समुद्र-मन्थन कर रहे थे, उस समय विष्णु ने कूर्म-रूप धारण कर मन्दराचल को अपनी पीठ पर धारण किया था। पुराणों में कूर्म (कमठ, कच्छप कश्यप) को विष्णु का रूपान्तरण कहा गया है, पर वैदिक साहित्य में (मत्स्य की तरह ही) कूर्म भी प्रजापति का ही रूपान्तरण है। शतपथ ब्रा. (७/५/१/५) के अनुसार कूर्म प्रजापति का रूपान्तरण है। प्रजापति ने अपत्यों की सृष्टि करते समय कूर्मरूप ग्रहण किया था-स यत् कूर्मो नाम। एतदै रूपं कृत्वा प्रजापतिः प्रजाः असृजत। 'कूर्म' को स्पष्ट करते हुए कहा गया है-यदसृजत अकरोत् तत्, यदकरोत् तस्मात् कूर्मः। कश्यपो वै कूर्मः । तस्मादाहुः सर्वाः प्रजाः काश्यप्य इति (वही) अर्थात् 'सृजन' किया था को ही कहते हैं 'किया' था। इस रूप से 'सृजन' किया था, इस कारण इस रूप को कूर्म (कृ करना औणादिक मनिन्) कहते हैं। कूर्म का ही अपर नाम कश्यप है। इसी कारण सारी प्रजा कश्यप १२१ की सन्तान कही जाती है। पाश्चात्...

कहार (कश्यप) जाति का इतिहास, कहार शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

 कहार भारत में पाई जाने वाली एक हिंदू जाति है. इनका इतिहास प्राचीन और गौरवशाली है. यह खुद को कश्यप ऋषि और सप्तऋषियों का वंशज होने का दावा करते हैं. कश्यप ऋषि मरीचि के पुत्र थे. ऐसी मान्यता है कि मरीचि से ही सारे देवताओं और असुरों की उत्पत्ति हुई है. कहार एक बहादुर और साहसी जाति है. पारंपरिक रूप से यह जाति अपने जीवन यापन के लिए प्राचीन काल से ही डोली या पालकी उठाने और उसकी रक्षा करने का कार्य करती आई है. इन्हें गोंड, गौड़, धुरिया कहार, मेहरा, भोई, चंद्रवंशी क्षत्रिय कहार आदि नामों से भी जाना जाता है. कहार जाति के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि पुराने समय में जब डाकुओं का प्रचलन जोरों पर था. ये डाकू रास्ते में दुल्हन की डोली और गहने जेवर लूट लिया करते थे. डोली की रक्षा के लिए कहर दल का गठन किया गया था जो दुल्हन की डोली को सुरक्षित अपने गंतव्य पर पहुंचाते थे. इनके पूर्वज विकट परिस्थितियों में जान पर खेलकर राज परिवार के बहू- बेटियों को डोली में बिठाकर, जंगलों और बीहड़ों से होते हुए, उन्हें दुश्मनों और डाकुओं से बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुचाते थे. लेकिन राजे रजवाड़ों के शासन समाप...

महान स्वतंत्रता सेनानी मास्टर मोता सिंह कश्यप जी

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  कश्यप निषाद समाज के लोगों ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़ कर भाग लिया है और सर्वसमाज के लोगों में संघर्ष का जज्बा पैदा किया। ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे पंजाब के मास्टर मोता सिंह कश्यप जी। स्व० मोता सिंह कश्यप का जन्म गांव पतारा जिला जालंधर में 28 फरवरी 1888 श्री गोपाल कश्यप जी के घर हुआ था। इनकी माता जी का नाम रेल्ली देवी था। प्राथमिक शिक्षा इन्होंने गांव के स्कूल में ही प्राप्त करी और दसवी के बाद पढ़ाई के साथ-2 जालंधर के निजी स्कूलो में अध्यापक का काम करने लगे। पंजाब यूनिवर्सिटी से इन्होंने बी.ए। अंग्रेजी के साथ-2 पंजाबी भाषा में ज्ञानी और फारसी भाषा में मुंशा-ए-फाजिल की उपाधि प्राप्त करी। सन् 1914-15 में मास्टर मोता सिंह कश्यप जी संत सिंह सुक्खा सिंह मिडल स्कूल, अमृतसर में बतौर हैडमास्टर नौकरी करने लगे। मास्टर मोता सिंह कश्यप जी ने कई अन्य स्कूलो में भी बतौर अध्यापक सेवाएं दी जिनमे मालवा का हाई स्कूल, खालसा हाई स्कूल दमदम साहिब, खालसा स्कूल फिरोजपुर आदि प्रमुख थे। 1918-19 में मोता सिंह कश्यप जी अध्यापन कार्य दमनकारी रॉलेट एक्ट के विरोध में आजादी की जंग में शामिल हों गए और 11 अप्...

श्री छज्जू राम धीवर (कश्यप)

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  सतगुर प्रसादि ॥ गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब पा.प्वी अम्बाला (हरियाणा) संखेप ऐतिहासिक  यह स्थान श्री गुरु हर कृष्ण साहिब जी की चरन छोह प्राप्त है। गुरु साहिब जी दिल्ली जाते समय विक्रमी 1720 माघ सुदी 7,8,9 को इस स्थान पर आए और तीन दिन रह कर संगतों को पवित्र उपदेश द्वारा निहाल किया। श्री लाल चन्द पंडित के प्रशन पूछने पर गुरु साहिब जी ने गूंगे बहरे छज्जू झीवर को साथ ही बने पानी के कुण्ड़ में (यहां पर सरोवर साहिज है) स्नान करवा के कृपा दृष्टि कर सिर के ऊपर छड़ी रखकर श्री मद् भागवत् गीता के अर्थ करवा दिये । उसी समय पंड़ित का अंहकार टूट गया। वह गुरु साहिब के चरनों में गिर पड़ा और श्रद्धालु सिक्ख बन गया। गुरु जी के आदेश अनुसार उसने आपना सारा जीवन सिक्खी के प्रचार में लगा दिया। गुरु साहिब जी ने रेत की टिब्बी लगाकर उसमें सुन्दर निशान साहिब को खड़ा किया और वर दिया कि आज से इस स्थान पर जो भी मनुष्य प्रेम भावना से आयेगा और सरोवर साहिब में स्नान करेगा, उसकी हर इच्छा पूर्ण होगी और यहाँ पर गंगे बहरे ठीक होंगे। यह बचन कर गुरु जी कुछ सिक्ख संगतों के साथ दिल्ली की ओर चले गये नोट- यहाँ पर हर ...