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Showing posts from March, 2025

कौन थे ऋषि कश्यप | Who was Rishi Kashyap

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  कौन थे ऋषि कश्यप हिंदू धर्म के अनुसार, प्रारंभिक काल में ब्रह्मा जी ने समुद्र और धरती पर हर प्रकार के जीवों की उत्पत्ति की. इस काल में उन्होंने अपने कई मानस पुत्रों को भी जन्म दिया, जिनमें से एकमरीची थे. कश्यप ऋषि मरीची जी के विद्वान पुत्र थे. इनकी माता कला कर्दम ऋषि की बेटी व भगवान कपिल देव की बहन थीं. अपने श्रेष्ठ गुणों, प्रताप व तप के बल पर उनकी गिनती श्रेष्ठतम महान विभूतियों में होती थी. मान्यता है कि सृष्टि की रचना में कई ऋषि मुनियों ने अपना योगदान दिया. जब हम सृष्टि के विकास की बात करते हैं तो इसका अर्थ जीव, जन्तु या मानव की उत्पत्ति से होता है. पुराणों के अनुसार कश्यप ऋषि के वंशज ही सृष्टि के प्रसार में सहायक हुए. कश्यप जी की 17 पत्नियां थीं, जिनके वंश से सृष्टि का विकास हुआ. सृष्टि के निर्माता कश्यप ऋषि कश्यप ऋषि को सृष्टि का निर्माता भी माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, मान्यता है कि कश्यप ऋषि से ही संपूर्ण सृष्टि का निर्माण हुआ है. पुराण के अनुसार, कश्यप जी की पत्नियों से ही मानस पुत्रों का जन्म हुआ. जिसके बाद से इस सृष्टि का सृजन हुआ. इसीलिए महर्षि कश्यप सृष्टि के...

24 मई को पानीपत के सेक्टर 13-17 ग्राउंड में भव्य रूप से मनाई जाएगी राज्यस्तरीय कश्यप जयंती – विधायक रामकुमार कश्यप

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  पानीपत (मनदीप कुमार) – हरियाणा कश्यप राजपूत सभा की राज्य स्तरीय बैठक रविवार को नेशनल हाईवे स्थित रोड धर्मशाला में प्रधान समय सिंह कश्यप की अध्यक्षता एवं महासचिव बीरभान आर्य के नेतृत्व में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य 24 मई को पानीपत के ऐतिहासिक सेक्टर 13-17 ग्राउंड में विधायक रामकुमार कश्यप के नेतृत्व में आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय महर्षि कश्यप जयंती समारोह की रूपरेखा तैयार करना था। सभा के प्रधान समय सिंह कश्यप ने जानकारी दी कि इस भव्य आयोजन में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि समारोह की अध्यक्षता इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप करेंगे। इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश से करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। रविवार को हुई बैठक में इस आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने हेतु रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में उपस्थित सभा के सदस्यों ने इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप का फूल मालाओं और पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। महासचिव बीरभान आर्य ने बताया कि समारोह को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए विभिन्न कार्य समितियों का गठन किया गया है, जिसमें युवाओं...

कश्यप Army युवा संगठन

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  कश्यप Army युवा संगठन (एकता, सम्मान और संघर्ष के साथ) --- 1. संगठन का उद्देश्य युवाओं को एकजुट कर समाज के उत्थान के लिए कार्य करना। शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व और समाजसेवा को बढ़ावा देना। देशभक्ति, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना। कश्यप समाज को सशक्त बनाकर विकास की नई ऊँचाइयाँ छूना। --- 2. संगठन की संरचना (i) प्रमुख पदाधिकारी संस्थापक / मुख्य अध्यक्ष: संगठन का सर्वोच्च नेतृत्व करेगा। उपाध्यक्ष: अध्यक्ष का सहयोग करेगा और उसकी अनुपस्थिति में कार्यभार संभालेगा। महासचिव: सभी निर्णयों, बैठकों और संगठन के रिकॉर्ड को बनाए रखेगा। कोषाध्यक्ष: संगठन के वित्तीय मामलों का संचालन करेगा। प्रचार मंत्री: संगठन के संदेश और अभियानों का प्रचार-प्रसार करेगा। (ii) कार्यकारी समिति संगठन की गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से लागू करेगी। क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर सदस्यों के कार्यों की निगरानी करेगी। (iii) राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी प्रत्येक राज्य, जिला और ब्लॉक में संगठन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। --- 3. सदस्यता नियम कोई भी 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का युवा...

कश्यप वंश का मर्द वही (कविता) कश्यप

 कश्यप वंश का मर्द वही, जो धरती पर मिसाल बने, जिसकी वाणी में तेज हो, जो सत्य की ढाल बने। जो अर्जुन सा लक्ष्य साधे, पर भीष्म सा व्रत निभाए, जो कृष्ण सी मति रखे, पर कर्ण सा दान लुटाए। वो मर्द नहीं जो केवल शक्ति का घमंड करे, कश्यप का वंशज वो, जो धर्म की राह चले। जो अधर्म से लड़ने को सुदर्शन उठा सके, पर प्रेम से दुश्मन को भी गले लगा सके। जिसकी रगों में कश्यप ऋषि की आस्था बहे, जो सत्य, तप और संयम की राह चले। जिसकी हुंकार से अधर्म कांपे, जो सदियों तक अपने कर्म से जाने जाए। कश्यप का वंशज वो, जो न्याय का दीप जलाए, जो रण में शेर और अपनों के लिए साया बन जाए। जो मरकर भी अमरता पा जाए, जिसका नाम युगों तक गूंजता रह जाए!

कश्यप बैठक" – एक नई सोच, एक नई शुरुआत

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  "  "कश्यप बैठक" – एक नई सोच, एक नई शुरुआत! समय के साथ संवाद की परिभाषा बदल रही है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी में गहराई से सोचने और सार्थक चर्चाएँ करने के मौके कम होते जा रहे हैं। लेकिन इसी डिजिटल युग में, संवाद की शक्ति पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो गई है। "कश्यप बैठक" इसी सोच का परिणाम है—एक ऐसा मंच जहाँ विचारों की स्वतंत्र उड़ान होगी, जहाँ समाज, संस्कृति, समसामयिक मुद्दे और जीवन के अनछुए पहलुओं पर खुलकर चर्चा होगी। क्या है "कश्यप बैठक"? यह सिर्फ एक इंस्टाग्राम सेगमेंट नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी पहल है! यहाँ हम विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, नई दृष्टि विकसित करेंगे, और उन मुद्दों पर बात करेंगे जो वास्तव में मायने रखते हैं। यह एक ऐसा मंच होगा जहाँ हर आवाज़ सुनी जाएगी, हर विचार को महत्व मिलेगा, और हर चर्चा ज्ञान और जागरूकता की नई रोशनी बिखेरेगी। पहली ऐतिहासिक बैठक – लाइव सेशन! हमारी पहली "कश्यप बैठक" लाइव होने जा रही है [तारीख] को [समय] बजे। यह सिर्फ़ एक सेशन नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत होगी—जहाँ संवाद की ताकत महसूस की जाएगी, जहाँ विचार टकर...

महर्षि कश्यप जयंती समारोह - 2025 ( राज्य स्तरीय बैठक) 30 मार्च 2025

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 महर्षि कश्यप जयंती समारोह - 2025 हरियाणा कश्यप राजपूत सभा के तत्वावधान में समस्त कश्यप समाज इस वर्ष महर्षि कश्यप जयंती समारोह का आयोजन ऐतिहासिक पानीपत की भूमि पर शनिवार, 24 मई 2025 को करने जा रहा है। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि मुख्य अतिथि: हरियाणा के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी अध्यक्ष: इंद्री से विधायक एवं चीफ व्हिप, हरियाणा सरकार श्री रामकुमार कश्यप जी अन्य विशिष्ट अतिथि: हरियाणा सरकार के कई मंत्री एवं विधायक इस विशाल आयोजन में लगभग एक लाख श्रद्धालु भाग लेंगे। --- समारोह की तैयारियों हेतु राज्य स्तरीय बैठक दिनांक एवं समय: 30 मार्च 2025 (रविवार), प्रातः 11:00 बजे स्थान: रोड धर्मशाला, जी.टी. रोड, पानीपत बैठक की अध्यक्षता: श्री समे सिंह कश्यप (प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा कश्यप राजपूत सभा) बैठक का संचालन: श्री बीरभान आर्य (मुख्य महासचिव, हरियाणा कश्यप राजपूत सभा) उपस्थित गणमान्य: बैठक में प्रदेश स्तरीय नेता, जिला एवं ब्लॉक के प्रधान, कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी एवं सक्रिय कार्यकर्ता भाग लेंगे। --- प्रदेश स्तरीय गणमान्य व्यक्ति रोहतक श्री बलजीत मतौरिया (सरपरस्त) श्री रा...

महर्षि कश्यप जयंती महोत्सव: ऐतिहासिक भूमि पानीपत पर भव्य आयोजन

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  हरियाणा कश्यप राजपूत सभा के तत्वावधान में समस्त कश्यप समाज इस बार महर्षि कश्यप जयंती समारोह पानीपत की ऐतिहासकि धरती पर शनिवार 24 मई 2025 को आयोजित करने जा रहा है।इस समारोह में हरियाणा के यशस्वी# मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे तथा इन्द्री से विधायक,चीफ व्हीप हरियाणा सरकार श्री रामकुमार कश्यप जी इस समारोह कि अध्यक्षता करेंगे । प्रदेश के कई मंत्री एवं विधायक भी भाग लेंगे। इस विशाल जयंती समारोह में लगभग एक लाख श्रद्धालु भाग लेंगे। इस समारोह कि तैयारियों के लिए समस्त कश्यप समाज हरियाणा कि एक राज्य स्तरीय मिंटिग दिनांक 30/03/2025 प्रात 11बजे प्रदेश अध्यक्ष श्री समे सिंह कश्यप कि अध्यक्षता में रोड धर्मशाला पानीपत में जी.टी.रोड स्थित बुलाई गई है।इस मिटिंग का संचालन सभा के मुख्य महासचिव श्री बीरभान आर्य करेंगे। इस राज्य स्तरीय मिटिंग में प्रदेश स्तरीय नेता और जिला, ब्लाक के प्रधान तथा कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी भाग लेंगे । हर जिले से सक्रिय कार्यकर्ता भाग लेंगे । रोहतक से श्री बलजीत मतौरिया सरपरस्त हरियाणा कश्यप राजपूत सभा,राजेश कश्यप,सतबीर कश्यप महम...

हरियाणा में कश्यप समाज की राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों की मांग 22-12-2023

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  हरियाणा में कश्यप समाज, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20% हिस्सा रखता है, अब राजनीतिक रूप से सक्रिय होता जा रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही समाज ने अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व की मांग को बुलंद कर दिया है। इसी कड़ी में, शुक्रवार को करनाल की कश्यप धर्मशाला में "आरक्षण जन जागरण अभियान" का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद विशेष रूप से उपस्थित रहे। कश्यप समाज का ऐतिहासिक योगदान और उपेक्षा अपने संबोधन में डॉ. संजय निषाद ने कहा कि कश्यप समुदाय का भारत की स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि इस समुदाय को बुद्धि धीमर के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ "राजकुमार" होता है। इतिहास के विभिन्न कालखंडों में मुगलों और अंग्रेजों ने इस समाज को कमजोर करने का प्रयास किया, जिससे यह समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ता चला गया। डॉ. निषाद ने यह भी बताया कि अंग्रेजों ने इस समुदाय को "क्रिमिनल कास्ट" घोषित कर दिया था, जिससे इनके सामाजिक अधिकार छिन गए...

हिंदू कश्यप समुदाय पर हुआ अत्याचार आज तक हम से छिपाया गया

आंतरिक कलह एवं आक्रांताओं के षड्यंत्र से हिंदू हुए पराजित युद्ध में विजय और पराजय के आंतरिक और बाह्य दोनों कारण होते हैं। हिंदू जब भी इन दोनों परिस्थितियों के अनुकूल रहे, वे विजयी हुए। विदेशी आक्रांताओं एवं महत्त्वपूर्ण लुटेरों के साथ हुए युद्धों में हिंदू लगातार विजयी होते रहे। किंतु जहाँ भी पराजय हुई, उसमें प्रायः आंतरिक कारण अधिक प्रभावी रहे। कहीं हिंदू राजाओं को नेतृत्व में अक्षम राजा मिले, तो कहीं उनकी सेना की संख्या सीमित कर दी गई। परंतु जब भी हिंदू योद्धाओं ने किसी राजा की ओर से युद्ध किया, उन्होंने निष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होकर रणभूमि में शौर्य का प्रदर्शन किया। हिंदू राजाओं में आंतरिक कलह मुख्यतः व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के कारण था। उन्होंने समय पर यह नहीं समझा कि राष्ट्रीय समस्या के समय व्यक्तिगत मतभेदों को छोड़कर सर्वप्रथम देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। जब तक लोगों ने देशहित को सर्वोपरि माना, तब तक विदेशी आक्रांताओं को देश की एक इंच भूमि भी प्राप्त नहीं हो सकी। किंतु जब हिंदू राजाओं में आपसी संघर्ष बढ़ा, तभी विदेशी आक्रांताओं को आक्रमण का ...

एक मृगसेन धीवर की कथा

केवलज्ञानरूपी नेत्र के धारक श्री जिनेन्द्र भगवान् को भक्तिपूर्वक प्रणाम कर मैं अहिंसाव्रत का फल पाने वाले एक धीवर की कथा लिखता हूँ ॥१॥ सब सन्देहों को मिटाने वाली, प्रीतिपूर्वक आराधना करने वाले प्राणियों के लिए सब प्रकार के सुखों को प्रदान करने वाली, जिनेन्द्र भगवान् की वाणी संसार में सदैव बनी रहे ॥२॥ संसाररूपी अथाह समुद्र से भव्य पुरुषों को पार कराने के लिए पुल के समान ज्ञान के सिन्धु मुनिराज निरन्तर मेरे हृदय में विराजमान रहें ॥३॥ इस प्रकार पंचपरमेष्ठी का स्मरण और मंगल करके कर्मरूपी शत्रुओं को नष्ट करने के लिए मैं अहिंसाव्रत की पवित्र कथा लिखता हूँ । जिस अहिंसा का नाम ही जीवों को अभय प्रदान करने वाला है, उसका पालन करना तो निस्सन्देह सुख का कारण है । अतः दयालु पुरुषों को मन, वचन और काय से संकल्पी हिंसा का परित्याग करना उचित है। बहुत से लोग अपने पितरों आदि की शान्ति के लिए श्राद्ध वगैरह में हिंसा करते हैं, बहुत से देवताओं को सन्तुष्ट करने के लिए उन्हें जीवों की बलि देते हैं और कितने ही महामारी, रोग आदि के मिट जाने के उद्देश्य से जीवों की हिंसा करते है परन्तु यह हिंसा सुख के लिए न होकर द...

गणेशजी ने द्वैपायन को घेरा और पूछा, "भगवन्! आपके जन्म की कथा उस रात अधूरी ही रह गई थी

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  धर कुछ दिनों से उमस बहुत बढ़ गई थी। आषाढ़ में वर्षा हुई तो थी, लेकिन इतनी इ नई नहीं कि धरती के कलेजे में जमा ताप पूरी तरह शांत हो जाता। बादल उमड़ते थे। लगता था कि अब वर्षा हो जाएगी, लेकिन बरसने की जगह वे थोड़ी देर में इधर-उधर छिटककर उड़ जाते थे। रह जाती थी वातावरण में चिपचिपी गरमी और उमस। प्रकृति की ही तरह द्वैपायन से उनके जीवन की पूर्वपीठिका के आंशिक श्रवण के बाद गणपति की उत्सुकता भी कुछ अधिक बढ़ गई थी। केवल प्रातः कर्मों के बाद एक दिन फिर गणेशजी ने द्वैपायन को घेरा और पूछा, "भगवन्! आपके जन्म की कथा उस रात अधूरी ही रह गई थी। उसके बाद क्या हुआ?" "ज्यादा कुछ नहीं, " द्वैपायन बोले, "विघ्नेश्वर ! पहले तो प्रसव की व्यवस्था का कार्यक्रम किसी दूरस्थ स्थान के लिए बना। शायद यह योजना रही होगी कि प्रसव के बाद नवजात शिशु को वहीं किसी को सौंपकर माँ को नाना ले आएँगे, लेकिन माँ के प्रबल विरोध के कारण इस योजना का परित्याग मेरे मातामह को करना पड़ा। अंततः यमुना के तटवर्ती उसी गाँव में मेरा जन्म हुआ। "इसके बाद दो-तीन वर्षों तक ऐसी कोई घटना नहीं घटी, जो उल्लेखनीय हो। मेरे ...