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एक नाम — एक पहचान: बाबू जयपाल सिंह कश्यप और कश्यप समाज के आत्मसम्मान का ऐतिहासिक आंदोलन”

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  बाबू जयपाल सिंह कश्यप के बारे में विशेष - A- बाबू जयपाल सिंह कश्यप — कौन थे और क्या था विशेष? राष्ट्रव्यापी पहचान और नेतृत्व बाबू जयपाल सिंह कश्यप जी (जन्म: 1 जुलाई 1935, उझैनी, बुदौन, यूपी) लोकसभा सांसद थे, जिन्होंने 1980 में जनता (एस) पार्टी से आवला से चुनाव जीतकर संसद में प्रतिनिधित्व किया। वे ऊंची कोटि के वकील इलाहाबाद से वकालत से जुड़े और शोषित वर्गों की सेवा के समर्पित नेता थे—विशेषकर कश्यप, निषाद, गोंड जैसे पिछड़े समाजों उपजातियां को एक करने के लिए अपने घर परिवार सुख सुविधाओं में ठोकर मार कर उन तमाम नौनिहालों के नाम पर अपने जीवन को कुर्बान करने वाले उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकता और पहचान की स्थापना समाज में विभिन्न उपजातियाँ (जैसे निषाद, कहार आदि) थीं, जिनकी अलग-अलग पहचान उन्हें विभाजित करती थी। उनकी पहल से "कश्यप" नाम को एक साझा पहचान के रूप में स्वीकार करवाया गया, जिससे समाज एकजुट हुआ और उसे संविधान-वैधानिक मान्यता भी मिली । राजनीतिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक उन्होंने न सिर्फ सामाजिक पहचान सुनिश्चित की, बल्कि जनहित की राजनीति को आगे बढ़ाया, जिससे समाज म...

अखिल भारतीय आदिवासी कश्यप–कहार–निषाद–भोई समन्वय समिति

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  जलजीवी समुदायों की एकता, इतिहास और स्वाभिमान का प्रतीक भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का एक मजबूत स्तंभ जल से जुड़े समुदाय रहे हैं। निषाद, कश्यप, कहार, भोई, केवट, मल्लाह, माझी, धीवर, मछुआरे और जलवाहक समाज ने नदियों, झीलों और समुद्रों के साथ रहकर सभ्यता को आगे बढ़ाया। इसी गौरवशाली परंपरा और साझा इतिहास को एक मंच पर लाने का प्रयास है “अखिल भारतीय आदिवासी कश्यप कहार निषाद भोई समन्वय समिति”। आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत इस पोस्टर में ऐसे महापुरुषों और आराध्य व्यक्तित्वों को दर्शाया गया है जिन्होंने भारतीय समाज को दिशा दी: मां मुण्डा देवी – शक्ति और आस्था का प्रतीक मत्स्य नारायण स्वामी – जल और जीवन का दिव्य अवतार महर्षि कश्यप – सृष्टि के महान ऋषि और कश्यप वंश के मूल पुरुष महर्षि वेदव्यास – वेदों और महाभारत के रचयिता ये सभी दर्शाते हैं कि जलजीवी समुदायों का संबंध केवल आजीविका से नहीं, बल्कि धर्म, दर्शन और संस्कृति से भी जुड़ा रहा है। स्वतंत्रता संग्राम और वीरता की परंपरा पोस्टर में देश के लिए बलिदान और शौर्य का प्रतीक बने महान नायकों को भी स्मरण किया गया है: ...

🔱 कीर (कश्यप) समाज का इतिहास एवं जानकारी | History and information of Keer (Kashyap) society

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  🌞 क्षत्रिय सूर्यवंशी कीर समाज – कश्यप वंश की गौरवगाथा कीर समाज भारतीय क्षत्रिय वर्ण का एक महत्वपूर्ण समुदाय है, जिसका मूल संबंध ऋषि कश्यप से माना जाता है। ऋषि कश्यप ब्रह्मा जी के मानसपुत्रों में से एक थे और उन्हें मानव जाति का जन्मदाता भी माना गया है। उन्होंने ही अनेक वंशों की रचना की, जिनमें देव, दानव, नाग, यक्ष, गंधर्व और मनुष्यों का प्रमुख स्थान रहा। 🕉️ कश्यप ऋषि और कश्मीर का संबंध वेदों और पुराणों में वर्णन मिलता है कि ऋषि कश्यप ने ही कश्मीर की स्थापना की थी। बाद में यह क्षेत्र भगवान श्रीराम के पुत्र कुश को प्राप्त हुआ। कुश के वंशज धर्मपाल और फिर गोपाल ने इस क्षेत्र को "कीर राज्य" के रूप में स्थापित किया। इस ऐतिहासिक आधार पर यह माना जाता है कि कीर समाज की उत्पत्ति कश्मीर से हुई और वहां से यह समुदाय राजस्थान की ओर प्रवास कर गया। 🚩 सूर्यवंशी होने का प्रमाण कीर समाज स्वयं को भगवान श्रीराम का वंशज मानता है। रामचंद्र जी स्वयं सूर्य वंश से थे, जिनका मूल ऋषि कश्यप के पुत्र विवस्वान (सूर्य) से माना जाता है। यही सूर्य से उत्पन्न मनु "वैवस्वत मनु" कहलाए और उनसे ...

🔱 "कश्यप ऋषि की नाग वंश शाखा: नागलोक के स्वामी, शिवभक्त वासुकि और उलूपी की गाथा"

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  नाग जाति की उत्पत्ति और उनकी कन्याओं के बारे में रोचक जानकारी.... * नागों के अष्टकुल  * नागकन्या  * नागलोक * नाग कुल की भूमि  * नाग और नाग जाति  * महाभारत में नागों की कहानी * भगवान शिव के गले में लिपटे नाग के 10 रहस्य भारत में पाई जाने वाली नाग जातियों और नाग के बारे में बहुत ज्यादा विरोधाभास नहीं है। भारत में आज नाग, सपेरा या कालबेलियों की जाति निवास करती है। यह भी सभी कश्यप ऋषि की संतानें हैं। नाग और सर्प में भेद है। पुराणों के अनुसार प्राचीनकाल में नागों पर आधारित नाग प्रजाति के मानव कश्मीर में निवास करते थे। बाद में ये सभी नागकुल के लोग झारखंड और छत्तीसगढ़ में आकर बस गए थे, जो उस काल में दंडकारण्य कहलाता था। सपेरा जाति का कालबेलिया नृत्य आज भी लोकप्रिय है। * नागों के अष्टकुल .... कश्यप ऋषि की पत्नी कद्रू से उन्हें 8 पुत्र मिले जिनके नाम क्रमश : इस प्रकार हैं- 1.अनंत (शेष), 2.वासुकि, 3.तक्षक, 4.कर्कोटक, 5.पद्म, 6.महापद्म, 7.शंख और 8.कुलिक। इन्हें ही नागों का प्रमुख अष्टकुल कहा जाता है। कुछ पुराणों के अनुसार नागों के अष्टकुल क्रमश: इस प्रकार हैं:- वासुकी,...

मरीचि कश्यप - ज्ञात मानव इतिहास की सबसे बड़ी बृहद और लंबी राजवंश-परंपरा ब्रह्मा के समान मानस-पुत्र की रही थी। पूर्णमास, पर्व, कश्यप जैसे आदिम राजवंशों के अलावा देव, दैत्य, दानव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर आदिम राजवंशों

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मरीचि कश्यप - ज्ञात मानव इतिहास की सबसे बड़ी बृहद और लंबी राजवंश-परंपरा ब्रह्मा के समान मानस-पुत्र की रही थी। पूर्णमास, पर्व, कश्यप जैसे आदिम राजवंशों के अलावा देव, दैत्य, दानव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर आदिम राजवंशों के लेकर मिस्र के नृगृतो, अमेरिका के इंका और मायांस, पश्चिमी एशिया के कुर्द, अमारेह, परशियन, उज़बेग और यूरोप के डच जैसी आधुनिक जातियां और भारत के प्रसिद्ध सूर्य, चंद्र और नाग राजवंश का मूल स्रोत मरीचि कुल ही था। मरीचि का मूल आश्रम सुमेरु शिखर (काकेशियन रीजन) के निकट उत्तर-मद्र में स्थित था। मरीचि कुल में उत्पन्न कश्यप के नाम से ही इस क्षेत्र में एक सागर का 'कैस्पियन सी' स्थित है, जो कि नामकरण और मठ के रूप में स्थित है, जिसमें से तीन द्वारा विकसित सुमेरियन, कैल्डियन, वेवोलियन आदि प्राचीन सभ्यताओं का उद्गम स्थल होने का संदर्भ है। मरीचि के इस आश्रम में काकेशियान रीजन में होने का प्रमाण मौजूद है। आर्यों के मूल पुरुष का क्षेत्र होने के कारण उत्तर-मद्र में भारतीय पुराणों में जहां 'आर्यवीर्यन' कहा गया है, वहीं जेंड अवेस्ता में इसे 'एरियनेम बेजो' और ग्रीक साहित्...