बाबा मोती मेहरा( कश्यप) जी
बाबा मोती मेहरा( कश्यप) जी 3 जनवरी 1705 शहीद बाबा मोतीराम मेहरा को औरंगजेब के किलेदार वजीर खान ने परिवार सहित कोल्हू में पीसा था बाबा मोतीराम मेहरा । जिनका वर्णन हर सिक्ख ग्रंथ में है । इन्हे सरहिन्द के किलेदार वजीर खान ने परिवार सहित जिन्दा कोल्हू में पीसा था । इनकी वीरता और बलिदान का उल्लेख बंदा बैरागी ने किया था । और इनकी स्मृति में एक गुरुद्वारा फतेहगढ़ में बना है । बाबा मोतीराम मेहरा के चाचा हिम्मत राय गुरु गोविन्द सिंह जी के पंच प्यारों में से एक थे सिक्ख बनकर उनका नाम हिम्मत सिंह हुआ । इनके पूर्वज जगन्नाथ पुरी उड़ीसा के रहने वाले थे । समय के साथ पंजाब आये और सरहिन्द में नौकरी कर ली । बाबा मोतीराम जी के पिता हरिराम कैदखाने की रसोई घर के इंचार्ज थे । दिसम्बर 1704 के अंतिम सप्ताह गुरु गोविन्द सिंह के चारों साहबजादे शहीद हुये थे । वह 27 दिसंबर 1704 की तिथि थी जब दो दिन की यातनाएं देकर गुरुजी को दो छोटे साहबजादों को जिन्दा दीवार में चुनवाया गया था । और गुरुजी माता गूजरी को अमानवीय यातनायें दी गयीं । वे भी शहीद हुईं । बाबा मोतीराम का अपराध यह था कि दिसम्ब...